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आशा

नागमणि कुमार सिंह 25 Aug 2026 कहानियाँ समाजिक आशा 1722 0 Hindi :: हिंदी

कहानी 
					                                                           शीर्षक : आशा 

	एक गाँव में आशा नाम की एक महिला रहती थी I वह उस गाँव की स्वास्थ्य कार्यकर्ता थी I वह गाँव के लोगों को स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करती थी I

	गाँव में बच्चों को पोलियो की दवा पिलाना , टी. बी. का दवा बाँटना , बच्चों के टीकाकरण  का हिसाब रखना, गर्भवती महिलायों का ध्यान रखना, कुपोषित बच्चों का ध्यान रखना आशा की ही जिम्मेदारी थी I

	वह सप्ताह में एक दिन पूरे गाँव में घूमती और जरूरतमंद  लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी प्रखंड अस्पताल को उपलब्ध कराती थी I 

	उसी गाँव में कुन्ती नाम की एक महिला रहती थी I वह इस गाँव में नया बियाह कर आयी थी I उसका पति मजदूरी करता था I उसके सास-ससुर भी मजदूरी करते थे I 

	वह हाल ही में गर्भवती हुई थी। गर्भवती की जानकारी आशा को कुन्ती से नहीं मिली I कुन्ती के पड़ोसी ने बताया की कुन्ती गर्भवती है I 

	एक दिन आशा कुन्ती के घर गयी I एक कागज पर सारी जाँच लिख दी और प्रखंड अस्पताल जाने की सलाह दी I उसने तत्काल में 10 आयरन की गोली खाने को दे दी I कुन्ती को घर पर आराम करने की सलाह दी I भारी –भरकम काम बिल्कूल नहीं करना है I सारी चीज बताकर आशा अपने घर चली गयी I

	अगले सप्ताह आशा फिर कुन्ती के घर गयी I आशा ने पूछा,” प्रखंड अस्पताल गयी थी I आयरन की गोली खायी थी I” 
	कुन्ती ने जवाब दिया, ”नहीं “

	आशा सुनकर चौक गयी I देखो, अब पहले का जमाना नहीं रहा I समय बदल गया है I यदि अस्पताल नहीं जायेगी I जाँच नहीं  करायेगी I आयरन की गोली नहीं खायेगी I तो एक स्वस्थ बच्चे की माँ कैसे बनेगी?

	कुन्ती ने जवाब दिया, “ हम तो चाहते है कि अस्पताल जाये, पर हमारे सास –ससुर मना करते है I वह कहते है कि हमने भी बहुत बच्चे पैदा किए है, लेकिन अस्पताल का मुँह नहीं देखा है I  क्या हमारे बच्चे हष्ट-पुष्ट नहीं है? क्या हमारे बच्चे जवान नहीं हुये? जिद करने पर डांट देते हैं I”

	आशा ने गुस्से से कहा,” कहाँ हैं  तुम्हारे सास-ससुर?”
	कुन्ती ने कहा,” दोनों अभी मजदूरी करने बाहर गए है I”

	आशा ने ज़ोर देकर कुन्ती से कहा,” जब तुम्हारे सास–ससुर घर वापस आ जाए तो हमारे घर भेज देना I”

	शाम को कुन्ती की सास आशा के घर आती है I आशा कुन्ती की सास को बहुत समझाती है,” देखिये अब समय बदल गया है I गर्भवती होते ही कई  जाँच होते है I आयरन की गोली खानी होती है I तब एक स्वस्थ बच्चा पैदा होता है I”

	कुन्ती की सास का वही रटा रटाया जबाव दिया,”हमने तो  बहुत बच्चे पैदा किए है, लेकिन अस्पताल का मुँह नहीं देखा है I कोई भी दवा  नहीं खायी है I”
	तब आशा ने कहा कि,” ठीक है, जब ऐसी बात है तो हम अब आपके घर नहीं आयेगें I” कुन्ती कि सास वापस अपने घर आ गयी I 
	ठीक आठ महीने बाद रात के बारह बजे कुन्ती के पेट में दर्द शुरू हुआ I कुन्ती की सास समझ नहीं पा  रही थी कि यह दर्द सामान्य दर्द है या बच्चा होने वाला दर्द है I क्योंकि अभी आठ महीने ही हुये थे I 

	कुन्ती का दर्द बढ़ता  ही जा रहा था I उसकी सास को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था I उसने बगल के दाय को बुलाया, लेकिन उसे भी कुछ समझ में नहीं आया I उसने आशा को बुलाने की सलाह दी I 

	कुन्ती की सास दौड़ी –दौड़ी आशा के घर गयी I आशा तुरंत आ गयी I आते के साथ ही कुन्ती की हालत देखकर कह दिया कि यह बच्चा होने वाला दर्द है I अभी आठ महीने ही हुये है इसलिए कुन्ती को प्रखंड अस्पताल ले जाना होगा I
 
	आशा ने तुरंत अपने मोबाइल फोन से एंबुलेंस गाडी को बुलाया I कुन्ती को एंबुलेंस गाडी से प्रखंड अस्पताल ले जाया गया I 

	प्रखंड अस्पताल के नर्स ने कुन्ती की सास को डांटते हुए कहा कि,” कुन्ती को और पहले लाना चाहिए था I मरीज की हालत ठीक नहीं है I मैं सामान्य डिलिवरी का प्रयास करते है I कुन्ती को नर्स डिलिवरी रूम में ले गयी I”

	कुछ ही देर में नर्स ने आकर बताया कि,” लड़का हुया है, लेकिन वजन बहुत कम है. बच्चा मात्र  1 किलोग्राम 600 ग्राम का है I इसे जल्दी ही जिला अस्पताल के एन.आई.सी.यू  वार्ड में भर्ती करना होगा।“

	कुंती और उसके बच्चे को उसी एंबुलेंस गाडी से जिला अस्पताल पहुंचाया गया I बच्चे को एन.आई.सी.यू  वार्ड में भर्ती किया गया I

	उसी समय कुन्ती कि सास ने आशा से माफी मांगी कि आज हमारे हाथ से दो खून हो जाता I आप समय रहते दोनों को बचा लिए I 

	उधर, कुन्ती ने आशा से कहा,” यदि आपकी बात मानते और रोज आयरन कि गोली खाते तो यह बच्चा का वजन इतना कम न होता I हमारी गलती के लिए हमें माफ करिएगा I 
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