SHUBHAM PATHAK 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य शुभम पाठक के पिता , दो अल्फ़ाज़ आपके लिए, मा न होने का एहसास। 36541 0 Hindi :: हिंदी
हर दिन जो ,आपने पिताजी
उस मां की झूठी बातों पे।
अपने कलेजे के टुकड़े को
जब जब आप ने दर्द दिया है
तब मैंने अपनी मां को याद किया हूं।
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ये हिस्से - बखरे सोना चांदी,
सब मैं आपके नाम किया हूं
दो पल खुशियों का बिता लेते
यही मैं आप से उम्मीद किया हूं।
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आप बेशक मानो उस मां को,
जिस मां ने मुझे जलील किया है।
कभी निम्ने से पूछ लेते, बेटे कैसे हो।
यही मैं आप से उम्मीद रखा हूं।
यही मैं आप से उम्मीद किया हूं।
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मैं भी हूं बुरा,
और मेरी भी कहीं गलती है।
पर मैं आपकी हालातों को मैं समझता हूं
खुले ,छूटे, पैसे हैं पापा ,
इस बात को कहने में हिचकिचाता हूं।
काश आप इस बात को समझ पाते।
और मुझे अपना बना पाते।
मुझे अपना बना पाते।
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और मां जब तेरी याद आती है
मुझे यह गाना खूब भाती है।
ए काश मेरा भी कोई होता
मेरे लिए कोई हंसता रोता।
✍️✍️शुभम पाठक✍️✍️