shivkumar barman 06 Jun 2025 कविताएँ हास्य-व्यंग 15906 0 Hindi :: हिंदी
आज मिली थी वो जिंदगी तो बोली तेरे चेहरे पर वो अब चमक नहीं रही सिगरेट कम पीया करो, तुम तेरे आवाज में वो खनक अब नहीं रही उसको कैसे कहें के हम तेरी आरजू ने ही तो ये हाल मेरा बना रखा है उसने तो कह दिया हमसे के अब रुखसार पर वो तेरा दमक अब नहीं रही मेरी ये रूह भी अब बेजान होती जा रही है मानो कोई तेरे उन राह का फकीर हो उसने तो कह दिया हमसे के तेरे बदन में अब पहले जैसा वो महक नहीं रही खिजां की रुत हो और वो फूल भी ऐसे महकते रहे, ऐसे कैसे उसने हमसे कह दिया के तेरे बदन में अब पहले जैसा वो महक नहीं रही मै तो बच्चे की तरह रो पड़ता था जैसे कोई खिलौना ही टूटा गया हो उसने तो कह दिया हमसे के तुझमें अब वो पहले जैसा कोई कसक नहीं रही वो मिली तो मैं बेजान खड़ा रहा लेकिन मेरी सासों में कोई हलचल ना हुई उसने तो कह दिया हमसे के तुझमें अब पहले जैसा वो सिसक नहीं रही उससे लगाव था महज, ये इश्क नहीं था, तो ये हाल हुआ उसने तो कह दिया हमसे के सूर्या के शब्दों में पहले जैसा वो कसक नहीं रहीमैंने समेट कर रखा है तुम्हारी हर एक चीज़ को- जैसे कोई इतिहास का विद्यार्थी किसी खोती सभ्यता के निशान बचाता है।।