संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 26251 0 Hindi :: हिंदी
कुंडलिया छंद आँसू आँखों में लिए, रखे जिया में लाज। पिया संग डोली चढ़ी, कोमल काया आज।। कोमल काया आज,लिए मन में मधु सपने। मंजुल चंचल हूर,रखे सुध दिल में अपने।। बनकर अनुपम आब,लगे सबको अति धाँसू। चली वधू ससुराल,लिए आँखों में आँसू।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....