संदीप कुमार सिंह 07 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 21693 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आशिक मेरे हैं सभी,बनकर अदभुत सोम। हँसी और मुस्कान से,खिल जाता है रोम।। खिल जाता है रोम,अहसास अदभुत मिलता। और बुद्धि हो तेज,फूल मन में है खिलता।। कहते कवि संदीप,शहर सुन्दर है नाशिक। जिसमें अनुपम नूर,जगत है जिसका आशिक।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....