संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 26550 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) अधरों तक ही रह गई, दिल की वह मधु बात। करने से पहले वफा, करदी जानम रात।। अधरों तक ही रह गई,हुस्न परी का प्यार। किसी और की हो गई,हम से कर तकरार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....