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अपने परिवार के लिए स्वयं का सुख अर्पित

संदीप कुमार सिंह 12 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 19831 0 Hindi :: हिंदी

तन समर्पित_मन समर्पित_जीवन समर्पित,
अपने परिवार के लिए स्वयं का सुख अर्पित।
अच्छे संस्कार से परिवार में खुशी है आती,
समाज में फिर सबको बहुत ही है सुहाती।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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