Pradeep singh " gwalya " 20 Sep 2025 कविताएँ समाजिक Psdrishti.Blogspot.Com 18444 0 Hindi :: हिंदी
असमंजस ये था कि
मैं गतिशील हूं या मुझे किया गया है ?
ये मेरी उम्र,मेरा शरीर और क्षमता को
क्या बढ़ाया गया है ?
कैसे कटा कठिन समय,परिस्थिति और
जो असल में था नहीं कठिन वो दौर भी
मैं सोचता–विचारता कुछ ओर रह गया
पर वो तो था कुछ और ही।
वो तो थी एक राह
जिसपर उसी का निर्णय या समरी थी
जो लगे शांत,ठहरी,बेजान
जिसे जान न सका वह प्रकृति थी ।
पता नहीं क्यूं उसके लिए अबतक
मेरे अन्तर्मन में भय था
पर अंततः जैसे क्षितिज की ओर निहारते कट गया
वो रास्ता जो उसके द्वारा तय था ।।
✍️प्रदीप सिंह 'ग्वल्या'
pradeep singh 'ग्वल्या' from sural gaon,pauri garhwal,uttarakhand. Born in 29/06/1995 ...