Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

आत्म चिंतन

Amit bhatt 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक Amit Bhatt 69205 0 Hindi :: हिंदी

अंगारित मन! कर शांत इसे, 
क्यों?भड़क रही यह ज्वाला है । 
क्रोध, शोक ओर ईर्ष्या, 
यह तो हलाहल का प्याला है।। 
जिसमें धँसता चला जा रहा है धीरे-धीरे , 
वह तो है तम का दलदल। 
है कपटी मन! क्यूँ कर रहा, 
मेरे अस्तित्व से पल पल छल।। 
यह चंचल मन! इसका बचपन, 
क्यूँ ठनी हुई इस से अन बन । 
क्यूँ विरक्ति हुई जग से,जगा इसमें अपना पन ।। 
क्यूँ कटु वचनों के वज्र पात, 
करते रहते हो दिन प्रति दिन । 
अपने ही व्यक्तित्व को तुम,कर रहे हो छिन्न भिन्न ।। 
विचार कर ! कर अभिमत ! 
क्यूँ व्यंग्य मलिन भरते हो । 
क्या अपने अंदर झांक कर कभी आत्म चिंतन करते हो ।। 
जेसे चाँदनी रात में तारों का प्रकाश लुप्त होता है, 
सूर्य की आभा में जुगनु विलुप्त होता है, 
उसी तरह यह मन, कुविचारों के आँचल में सुसुप्त होता है ।। 
इसे जगा ! हुंकार लगा ! 
बढ़ चल निर्वाणों के पथ पर । 
सारथी बना सुविचारों को, चढ़ जा आदर्शों के रथ पर ।। 

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: