Kalindri Pal 01 Aug 2026 कविताएँ बाल-साहित्य 3227 0 Hindi :: हिंदी
बचपन कितना प्यारा था, सबका लाड़ दुलारा था / भाई-बहन के साथ था, माँ बापू का प्यार था / चाहत चांद को पाना था, तितली का दिल दिवाना था / मौसम भी कितना प्यारा था , सावन का महीना सुहाना था/ वज़ह न थी कोई रोने की, न हँसने का बहाना था / सुबह ही पढ़ने जाना था , फिर घूमना और खेलना था / बचपन का प्यार सुहाना था , परिवार का प्यार जो पाना था / बचपन कितना प्यारा था , सबका लाड़ दुलारा था /
Myself kalindri pal I live in Ghaziabad (new delhi) 🙏😍🥰...