संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 19261 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) बदले बदले लग रहे,मौसम क्यों है आज। गरमी में कर के मजे,सबको है नव नाज।। बदले बदले लग रहे,वातावरण मिजाज। फिर भी दिल को चैन है,हृदय हुआ है बाज।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....