संदीप कुमार सिंह 04 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 37708 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरे अपने कर्म से, तेरा हो कल्याण। बढ़ते जाएं फिर सतत ,बनकर सबल कृपाण।। बनकर सबल कृपाण,पार हर बाधा करिए। सपने कर साकार,आह खुशियों की भरिए।। कहते कवि संदीप,पास सबकुछ है मेरे। प्यारा अपना देश,भरूं रति दिल में तेरे।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....