संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 28330 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) बनिए सच के सारथी, चले युगों तक नाम। देंगें सब सम्मान अति,लगें सदा गुलफाम।। बनिए सच के सारथी,होगी निश्चय जीत। अतुल शक्ति हो पास में,होगा रिपु भी मीत।। बनिए सच के सारथी,करें गलत का रोक। दूं भू को उपहार नव,देंगें दुआ त्रिलोक।। बनिए सच के सारथी,करूं जगत कल्याण। घर घर में नित भक्ति हो,सुख का हो निर्माण।। बनिए सच के सारथी,और बनें हमदर्द। साथी बन असहाय का,जीवन तब हो मर्द।। (स्वराचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....