संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 18288 0 Hindi :: हिंदी
कुंडलिया छंद दोहा में परिचय लिखें, बहुत खूब यह काम। सरल नाम संदीप है, रहूं देवड़ा गाम।। रहूं देवड़ा गाम,धर्म ही पूजा मेरा। कर्म करूं कमनीय,भाग्य का हुआ सवेरा।। जीवन में आनंद,सभी माने अब लोहा। करता हूं उपकार,मधुर जैसे है दोहा।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....