संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 60240 0 Hindi :: हिंदी
कुंडलिया छंद भारत भूमि अखंड हो, अटल सुरक्षित देश। युग युग तक हस्ते चले,रहे सदा अखिलेश।। रहे सदा अखिलेश,प्रगति की बहार आए। खुशियां सबके साथ,विश्व को भारत भाए।। घर घर हो बस धर्म,खत्म हो जाए गारत। मधुर मधुर हो लब्ज,शिखर पर पहुंचे भारत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....