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चाहत-मेरी चाहत इबादत हो गई है

DINESH KUMAR KEER 27 May 2023 कविताएँ समाजिक 30665 0 Hindi :: हिंदी

*चाहत*

*मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई है,*
*ये दुनिया ख़ूबसूरत हो गई हैं,*
*ख़ुदा से रोज तुम को माँगता हूं,*
*मेरी चाहत इबादत हो गई है,*
*वो चेहरा चाँद है आँखें सितारे,*
*ज़मी फूलों की जन्नत हो गई है,*
*बहुत दिन से तुम्हें देखा नहीं है,*
*चले भी आओ मुद्दत हो गई है,*

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