संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 30048 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) चिड़िया बैठी डाल पर, पवन बहे हैं मस्त। सभी जीव आनंद में,सबका दुख है अस्त।। चड़िया बैठी डाल पर, पुष्प भरे हैं प्यार। नव चाहत मन में लिए,निभा रही किरदार।। चिड़िया बैठी डाल पर,गाए मधु मल्हार। सबको देती है खुशी,लेती दुआ हजार।। चिड़िया बैठी डाल पर,देखे धरा निहार। मन ही मन में वह हसे,पाए नव उपहार।। चिड़िया बैठी डाल पर,खुशियों में हो मग्न। गाती अनुपम गीत जब,हो जाता शुभ लग्न।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....