संदीप कुमार सिंह 11 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 30102 0 Hindi :: हिंदी
पहले जैसे अब कहां,छलियों का है राज। छलते कोई भी यहां,बनते फिरते बाज। ऐसे में मुश्किल बड़ा,रहना पड़ता तेज_ देखें मंजिल को सदा,करें सुखद तब आज। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....