Ajeet 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य 75256 0 Hindi :: हिंदी
धान उगेंगे मेघ गरजेंगे
देखना गगन तुम जरूर/
बादलो को सूरज से पिघलाएंगे
खेतो को पानी से नहलाएंगे,
धान उगेंगे मेघ गरजेंगे
देखना गगन तुम जरूर/
न रोंदेंगे धानों को
न खोएंगे अपने प्राणो को
न खोएंगे अपने खेत-खलियानो को
न खोएंगे अपने धानों को,
धान उगेंगे मेघ गरजेंगे
देखना गगन तुम जरूर/
जिस दिन बादल गरजेंगे
उस दिन हवा से बादलो को फेरेंगे,
धान पकेंगे हमारे खेत में
देखना गगन तुम जरूर/
लेखक - अजीत