संदीप कुमार सिंह 05 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 20944 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) धीरे धीरे लक्ष्य पर,पैनी रखें निगाह। भटके कभी न वीर जो,मिलती उसे पनाह।। धीरे धीरे लक्ष्य पर,चलते चलिए आप। एक दिवस पक्का मिले,नित तब बढ़े प्रताप।। धीरे धीरे लक्ष्य पर,करते रहिए काम। खुशियाँ ही खुशियाँ मिले,अदभुत मिले मुकाम।। धीरे धीरे लक्ष्य पर,बड़े बड़े कर खोज। मिले सफलता आप को,जाएं बन कंबोज।। धीरे धीरे लक्ष्य पर,श्रम करिए नित आप। जीवन में हो चांदनी,ओर बने जगताप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....