संदीप कुमार सिंह 26 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 18953 10 5 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) मन में जब दृढ़ लगन हो,मंजिल मिले जरूर। फिर तो यहां मिशाल बन,दुनिया को दें नूर।। रहें तैयार हर घड़ी,मंजिल मिले जरूर। यहां असंभव कुछ नहीं,रहें बुरों से दूर।। सुबह शाम अब बस यही,अपना हो शुभ नाम। मंजिल मिले जरूर जब,करिए अपना काम।। और नहीं कुछ सोचता,खुद में हूं मैं चूर। दौड़ रहा हूं राह पर,मंजिल मिले जरूर।। मंजिल मिले जरूर तब,जब चलिए निज राह। नतमस्तक हो रोक सब,और बढ़ाए चाह।। पानी पानी हो रहा,मौसम है बरसात। सावन भी अब जोर में,हुई सुहानी रात।। पानी पानी हो रहा,भले लोग जो आज। निर्लज खाया लाज को,करता भी है राज।। पानी पानी हो रहा,शहर गांव सब यार। अच्छा तथा खराब भी,खुशियों में कचनार।। पानी पानी हो रहा,मानवता का मोल। मौका रहे तलाश में,दुर्जन हैं विश घोल।। पानी पानी हो रहा,रहे निर्लोभ शांत। लोभी को बरसात में,भी है दृढ़ नव कांत।। दिन दिन बढ़ता जा रहा, लोगों में अब लोभ। लेना चाहे पर माल को,जो है मनु पर चोभ।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,दुनियां में अपराध। जैसे जंगल राज हो,कुचल डाले साध।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,भीषण मय अब रोग। नर नारी खाए दवा,सुख का मिले न भोग।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,महँगाई की मार। मध्यम और गरीब अब,हैं अति अति लाचार।। दिन दिन बढ़ता जा रहा,नशा युवा में आज। बेकारी से त्रस्त जन,शिकवा ही अब साज।। सारी सीमा तोड़कर,खुद पर है विश्वाश। हरदम जीवन जंग है,होने मत दूं नाश।। सारी सीमा तोड़कर,करना है नव काम। जिसमें भला समाज का,होगा अपना नाम।। सारी सीमा तोड़कर,जीत यहां सब जंग। खुद पे हो विश्वास जब,जीने में तब रंग।। सारी सीमा तोड़कर,पर्वत के उस पार। प्रेम रंग में लीन हैं,खुशियाँ लिए हजार।। सारी सीमा तोड़कर,किया सरल व्यापार। जो था पूंजी सब लगा,फिर भी हूं बेकार।। मन में जब दृढ़ लगन हो,मंजिल मिले जरूर। फिर तो यहां मिशाल बन,दुनिया को दें नूर।। रहें तैयार हर घड़ी,मंजिल मिले जरूर। यहां असंभव कुछ नहीं,रहें बुरों से दूर।। सुबह शाम अब बस यही,अपना हो शुभ नाम। मंजिल मिले जरूर जब,करिए अपना काम।। और नहीं कुछ सोचता,खुद में हूं मैं चूर। दौड़ रहा हूं राह पर,मंजिल मिले जरूर।। मंजिल मिले जरूर तब,जब चलिए निज राह। नतमस्तक हो रोक सब,और बढ़ाए चाह।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
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I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....