संदीप कुमार सिंह 02 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 19394 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) घोंपे पीछे वह छुरा, उसका यह है जात। दूर्जन से दूरी भली, सदा करे आघात।। दूर्जन से दूरी भली, मन में रखता पाप। करता साथी का बुरा, रहें अलग सो आप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समतीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....