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फटेहाल जिंदगी

Raj Ashok 21 Aug 2024 कविताएँ हास्य-व्यंग फटेहाल जिंदगी 19633 0 Hindi :: हिंदी

ये शाम ढलेगी । 
फिर,सवेरे की तलाश में 
देख बुलंदी ,तुझे तेरा शिखर ,कल मिलेगा ।। 
 फिक्र ना कर 
फटेहाल जिंदगी का रोना 
अभी और चलेगा।।
तेरी मेहनत में अभी और रंजिशें बाकी है ।
अपने इरादों को ,थोड़ी ओर गर्मी दे
लोहे का आकार बदल  चाहे, 
तकदीर की चाल बदल
ये छल तो तुझें सम्भल के करना होगा ।।
फंसा है। क्यों,ये तेरा मन भंवर 
यों महक की गुलामी में 
अरे , रूप बदलती नार को ना वश में कर 
ये छलकती शामें रोज आएगी 
धुएं की धुंध से क्या है तेरा वास्ता  ।
 सोच, 
क्या है तेरा रास्ता  ......
       राज ....अ

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