हरवंश हृदय 12 Oct 2025 कविताएँ दुःखद #हरवंशहृदय #भावभीनीश्रद्धांजलि #शोकसंवेदना 17257 0 Hindi :: हिंदी
एक सूरज था आसमान में, एक नगर तिन्दवारी में अब दोनों चमकेंगे अम्बर में, नगर रहेगा अंधियारी में न जाने क्यों अनायास भाग्य हमारा रूठ गया ऐसा लगता है मानो, कोई बस्ती को लूट गया जैसे एक हीरा कोहिनूर, अपने हाथों से छूट गया चमचम करता एक सितारा, एक झटके में टूट गया श्री रामस्वरूप ने पुत्र रूप में राम स्वरूप ही पाया था परसेवा और परोपकार का भाव जिसे सिखलाया था आनंद हृदय में भरे हुए वो परमानंद चला गया श्रीरामस्वरूप के आंगन का देखो आनंद चला गया गुरुदेव आपके जाने से शान नगर की चली गई राज और धर्म मंचों पर पहचान नगर की चली गई कद काठी सामान्य मगर चेहरे पर तेज आलौकिक था हर विधा हर क्षेत्र के ग्रंथों का ज्ञान भी मौखिक था राजनीति के हर प्रकोष्ठ में अलग ही जलवा कायम था बात हमेशा वजनदार पर लहजा सदा मुलायम था ऐसे रहे वो प्रपंचों में जैसे कीचड़ में कमल रहे अंत्योदय का भाव लिए नेत्र सदा ही सजल रहे रंग रूप और पहनावे में सदा ही स्व अभिमान दिखा अटल से लेकर मोदी तक छाती पर कमल निशान दिखा फर्श से लेकर अर्श तलक तुम भाजपा के पर्याय रहे धर्म ध्वजा के ध्वजवाहक सर्वजन हिताय सुखाय रहे मर्यादाओं में बंधे रहे श्री पुरुषोत्तम का ध्यान धरा जब जहां जैसे भी हो परहित परकल्याण करा धर्मपंथ के अनुगामी प्रभु कार्यों के प्रति निष्ठा थी इसीलिए धार्मिक मंचों पर एक अलग प्रतिष्ठा थी राजनीति में होकर भी भौतिकता से दूर रहे तभी पूज्य गुरुदेव आप महाराज नाम से मशहूर रहे शोषित,दलित,अपवंचित वर्ग के तुम असली जननायक थे हे गुरुवर इस तिंदवारी में तुम सांसद तुम्हीं विधायक थे कलम सजी कर कमलों में तो ऐसे पाती लिख डाली जे पी नड्डा तक जो पहुंची नगर की ख्याति लिख डाली हर धार्मिक आयोजन में आप सतत अनिवार्य रहे सिमोनी मेला, रामलीला, सब रामकाज स्वीकार्य रहे हमें सदा निर्देश दिए और प्रभु चरणों से जोड़े रखा अंत समय भी तुमने प्रभु राम नाम पट ओढ़े रखा भाजपा के अधिनायक थे, सब कुछ छोड़े चले गए कफ़न रूप में पार्टी का ही झंडा ओढ़े चले गए कितनों को नाम दिया तुमने, कितनों के भाग्य संवारे हैं कितनों को राह बता गए कितनों के पंथ सुधारे हैं कितनों को पाठ सिखा गए, कितनों की बटन दबाई है हंसकर हाथ रगड़ने की तुमने ही कला सिखाई है ऐसे तो इस जग में नित लाखों ही आते जाते हैं इस रंगमंच पर कुछ ही हैं जो कर्मों से नाम कमाते हैं हे महापुरुष हे महाकाय हम तुमको भूल न पाएंगे जब भी अवसर मिला हमें तेरी यशगाथा गायेंगे आज ‘हृदय’ अति व्याकुल है, भाव अभाव सब अर्पित हैं श्री आनंदस्वरूप के चरणों में निज शब्द प्रसून समर्पित हैं भाजपा बांदा के जिला मीडिया प्रभारी, श्रीरामलीला कमेटी तिन्दवारी के प्रबन्धक पूज्य गुरुदेव श्री आनन्द स्वरूप द्विवेदी जी की पुण्य स्मृति में मेरी लेखनी से छलके अश्रु बिंदु भावभीनी श्रद्धांजलि के रूप में अर्पित हैं ….!! – हरवंश ‘हृदय’ बांदा