राकेश 30 Oct 2023 कविताएँ समाजिक गरीबी, दरिद्रता, कंगाली 41083 0 Hindi :: हिंदी
कंगाली करवाती है अपमान, पेट भरने को बिना धन के नहीं मिलता है खाने पीने का कोई सामान, कर्जा लेकर गरीब खो देता है अपना सुख चैन आराम, बेईमान धोखेबाज चोर, गरीब को मुफ्त में मिलते हैं यह नाम। मरने से लगता है गरीब को डर, अंतिम संस्कार के बिना कैसे जाएगा वह स्वर्ग, बिना पैसों के अंतिम संस्कार नहीं होगा जब, रोज चिंता भूख अपमान गरीब के आते हैं घर, गरीबी को खत्म करने का संकल्प ले अगर तो इस काम में नहीं होगा कुछ भी हमारा खर्च, बल्कि गरीबी से नहीं होगा किसी का अंत, यह पूण्य करके जीवन में सदा रहोगे मस्त।