Tarun 04 Dec 2024 कविताएँ समाजिक #motivation #inspiration 19246 0 Hindi :: हिंदी
जब लिया ठान है ही मन में , तो बस रास्तों को देख लो , सब फाँसलों को छोड़ दो , दिल में बैठी शंका है कैसी , ललाट पे ये भय है कैसा , मन में तुम धीरज रखो , जब हार देखनी ही नही तो खौफ खाना छोड़ दो , मंजिल का हो बस एक नशा , सब ख्वाहिशों को छोड़ दो ,सब ख्वाहिशों को छोड़ दो , ये तो बस एक जंग है , हार कैसी ? जीत कैसी ?जो अघटित हैं व्याप्त मन में , उन फैसलों को छोड़ दो , मंजिल एक पहाड़ है , तो तुम में दम पर्याप्त है , हौंसले की बिसात पे , गुरुर इसका तोड़ दो , किनारे पर है खड़ा जो, वो समुंद्री जहाज कैसा , जैसे ढेर हो राख जैसा , भर जुनून की आग तुम , इसे बीच समंदर छोड़ दो , भर जुनून की आग तुम , इसे बीच समंदर छोड़ दो , माना लहरें तेज हैं ,कांधो पर आशाओं का बोझ है , सबको झटक यूं आगे बढ़ो ,कि रुख लहरों का मोड़ दो , कि रुख लहरों का मोड़ दो स्वप्न जैसे बया का घर , घौंसले के निर्माण को तुम तिनका तिनका जोड़ दो , स्वप्न जैसे बया का घर , घौंसले के निर्माण को तुम तिनका तिनका जोड़ दो , जंग है ये लहू की प्यासी , तेरे ख़ून में है एक बूंद बाकी , वो बूंद अन्तिम निचोड़ दो , कर फैसला एक हौंसले का गुरूर इस मंजिल का निचोड़ दो, जीत है सुनिश्चित अगर मन में कोई भय न हो, दुश्मन की सेना से क्या डरना , तुम हाथियों की फौज पर चीटियों को छोड़ दो , तुम हाथियों की फौज पर चीटियों को छोड़ दो , है खुदा पर विश्वाश अगर तो उसे याद कर आगे बढ़ो , फिर भी डगमगाते है कदम , तो खुदा को सिर झुकाना छोड़ दो तो खुदा को सिर झुकाना छोड़ दो