कुमार किशन कीर्ति 23 May 2023 कविताएँ समाजिक गाँव, गोधूलि,कंचे 12248 0 Hindi :: हिंदी
याद आती है मुझे, कभी-कभी गाँव में गुजरे पल। गोधूलि के वक्त, कच्ची सड़कों पर साईकल के बेकार पहियों को घुमाना। बूढ़े पीपल के वृक्ष के नीचे, दोस्तों संग कंचे खेलना।
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