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गुलशन मय हो तब धरा-खिले सभी की साध

संदीप कुमार सिंह 30 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 27541 0 Hindi :: हिंदी

दोहा छंद
 गुलशन मय हो तब धरा,खिले सभी की साध।
मिले सभी को न्याय तो, होगा कम अपराध।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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