संदीप कुमार सिंह 28 Sep 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 31348 0 Hindi :: हिंदी
कुछ बातों को सदा के लिए गुप्त रहने दो, चेहरे पर फिर भी मुस्कान खूब रहने दो। तन जल जाएगा मिट्टी में हम मिल जायेंगे, गुप्त बातें भी हम सब के संग जल जायेगी। बात को पचाना भी एक कला है, इस कला में भी हम सब माहिर हो जाऊं। जाहिर तो ऐसा करूं खुशियाँ लुटाऊँ, दूसरे के गम में हिस्सेदार मैं बन जाऊं। बहुतों ने ढोल पीटा आग लगाई, राज की बातें उस में उलझ गई। दुनिया में बहुत रहस्य छुपा हुआ है, परदे पर परदा अति चढ़ा हुआ है। आज अपने को सभी अति स्याने समझते, शायद इसे आधुनिक विधा है समझते। खुल कर कोई भी सामने नहीं हैं आते, चेहरे पर एक नकली चेहरा लगाए रखते। कुछ बात_कुछ काम गुप्त ही रह जाते, लाख कोशिश के बाद भी बाहर न आते। सृष्टि निर्माण से लेकर ये बात चली आ रही है, शायद विध्वंस तक गुप्त बातें चलती रहेगी। ये सृजन और विसर्जन मूल रूप से अभी भी गुप्त है, रहस्योद्घाटन का प्रयास युगों से चलता आ रहा है। जिंदगी का कुछ विषय बड़ा ही जटिल है, इस जटिलता में ही उमर बित जाती है। और विषय तो हम सब के लिए गुप्त ही रह जाता है, शायद उस और ध्यान देने का ख्याल भी नहीं आता। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....