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हम सबको नित ही मिले-माँ का प्यार दुलार

संदीप कुमार सिंह 21 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 20143 0 Hindi :: हिंदी

#विधा:_मुक्तक छंद
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" 
हमसब को नित ही मिले,माँ का प्यार दुलार।
नेक इरादा यदि रहे, जीवन हो गुलजार।
लिए धर्म को साथ में,करूं सितम का नाश_
हर दिन नव उत्साह से,बाँटू  सबको प्यार।
(स्वाचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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