संदीप कुमार सिंह 07 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 29225 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हँसी और मुस्कान से,घायल करती नाज। दीवाना मैं जो बना,और लुटा दूं राज।। हँसी और मुस्कान से,खिल जाता है रोम। आशिक मेरे हैं सभी,बनकर अदभुत सोम।। हँसी और मुस्कान से,आई सरस बहार। लाई है उपहार अति,करती भव्य दुलार।। हँसी और मुस्कान से,रखिए चिन्ता दूर। औरों को भी कर सरस,लिए हृदय में नूर।। हँसी और मुस्कान से,करिए नित आदाब। पाएं दुआ असीम तब,रहे शक्ल पर आब।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....