संदीप कुमार सिंह 16 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 25535 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) हर युग में लेते सदा, ईश नव्य अवतार। करे नाश सब पापियों,को कायम हो प्यार।। मिली खुशी मय सूचना,आया दिव्य विचार। किया व्यक्त यह बात जब,हुए सभी गुलजार।। मुझे विश्वस्त सूत्र से,ज्ञात हुआ यह ज्ञान। पाकर बहुत प्रसन्न हूं,बढ़ा अधिक अब मान।। आमलकी एकादशी,खुशियाँ लाई खास। सुख वैभव देती सदा,पूरी करती आस।। आमंत्रित कवि वर्ग को,करता सरल प्रणाम। स्वागत में है आपके,जनता सरस तमाम।। आज दिखी जब सुनयने,जगा हृदय अनुराग। तन में हलचल अति हुआ,गो उठी सब जाग।। विहंगम चलते जब गगन,मिले नयन आराम। फिर जब बरसे आब तो,खुशी करे आवाम।। घर में मिले विरोध जब,जाता टूट गुमान। होकर सरल विनीत तब,बने सभ्य इन्सान।। ईश आप तो धन्य हैं,कण कण में है वास। जगत रचयिता आप ही,अनुपम है विन्यास।। दुर्गम करतब मैं करूं,बालाजी हैं साथ। करते संकट दूर सब,रखकर सिर पर हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....