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हरदम रखिए सादगी-खोए कभी न भोर

संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 20088 0 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद) 
हरदम रखिए सादगी, खोए कभी न भोर।
दो दिन के मेहमान है,जीवन का यह डोर।।

दो दिन के मेहमान हैं,हम सब सारे जीव।
रखिए उलफत पास में,मिलती खुशी अतीव।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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