संदीप कुमार सिंह 27 Jun 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह चार पंक्ति की मुक्तक कविता प्यार-मोहब्बत पर आधारित है. आप सभी पढ़िए बहुत ही मजा आने वाला है. 2903 0 Hindi :: हिंदी
हो दिलरूबा ये इश्क है एक जुआ। तुझपे ही मैं जान से कुर्बान हुआ । बिना तेरे तो मेरे अरमान जले_ जान अब तो मुझको बना ले बलमुआ। (स्वरचित मौलिक ) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....