संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 22031 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) इच्छाओं के दास हूं,सतत करूं मैं यत्न। अभिलाषा सब पूर्ण कर,प्राण बना है रत्न।। इच्छाओं के दास हूं, जिसमें ऊर्जा खास। कभी शिथिल होता नहीं,खुशियाँ तब है पास।। इच्छाओं के दास हूं,करूं नहीं आराम। कर के अथक प्रयास मैं,पाया सही मुकाम।। इच्छाओं के दास हूं,दुनिया है रंगीन। होता नीरस मैं नहीं,रहता नहीं अधीन।। इच्छाओं के दास हूं,सब साधन हो पास। चलूं समय के साथ मैं,टूटे कभी न आस।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....