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जागो रे भारत के लोगों

Ujjwal Kumar 16 Jun 2026 कविताएँ देश-प्रेम #जागो रे भारत के लोगों #jagorebhart #writerujjwal 1081 0 Hindi :: हिंदी

बढ़ती जाती महँगई, जन-जन रहे उदास।
मेहनत की कमाई घटे, टूट रही है आस॥१

सुबह कमाए आदमी, शाम करे निर्वाह।
फिर भी पूरे हो न सकें, जीवन के उत्साह॥२

प्रश्न करो अधिकार का, जागो लेकर ज्ञान।
जनता की आवाज़ से, बढ़ता देश का मान॥३

चुप्पी से परिवर्तन नहीं, जागो छोड़ो मोह।
सच की राह पकड़ चलो, मिटे अन्याय-द्रोह॥४

नफ़रत त्यागो प्रेम से, मिलकर बढ़ो समाज।
जागरूक जनशक्ति से, बदले देश का राज॥५

कलम उठाओ सत्य की, बोलो सच्ची बात।
भारत के उज्ज्वल दिवस, होंगे अपने हाथ॥६

जागो भारत के जनो, जागे जन-विश्वास।
सच के पथ पर जो चलें, मिले उन्हें उजास॥

 जागो भारत, जागो जनता,तुमसे ही देश महान।
जनबल से परिवर्तन हो,बढ़े राष्ट्र का मान। 

 *युवा रचनाकार* 
 *उज्जवल कुमार श्रीवास्तव* 
 *(हजारीबाग,झारखंड)*

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