Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

जहाँ किताबें जलती हैं

रघुवीर सिंह पंवार 16 Jun 2026 कहानियाँ बाल-साहित्य किताब जलती है, कुर्सी नहीं..." 1093 0 Hindi :: हिंदी

गांव की चाय की दुकान आज कुछ ज्यादा ही भरी हुई थी। पास के सरकारी स्कूल में निरीक्षण होना था और गांव के प्रधान, सुरेश जी, खुद तामझाम के साथ आये थे। दुकान के कोने में रखी टूटी-सी कुर्सी पर बैठा एक बच्चा, करीब नौ साल का, एक फटी हुई किताब में कुछ लिखने की कोशिश कर रहा था।हो सकता ओ जीवन के सपने बन रहा हो प्रधान जी की नजर उस पर पड़ी तो उनकी आंखें ठिठक गई “अरे ओ सुरेश! आज स्कूल नहीं गया क्या?” — उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा। बच्चे ने धीरे से सिर झुकाया। होंठ थरथरा रहे थे पर आवाज में कोई कंपन नहीं था। मुस्कुराहट गायब थी “स्कूल जाऊं कैसे साहब... कल रात पिताजी ने फिर किताबें जला दीं। बोले – पढ़-लिखकर क्या करेगा? खेत पर कम कर या या दुकान संभाल। और फिर... माँ को मारा। बहुत ज़ोर से...” भीड़ कुछ पलों को स्थिर हो गई। हँसी के स्वर थम गए, चाय की चुस्कियाँ रुक गईं। पास खड़े देवीलाल जी ने अनसुना करने की कोशिश की। उनकी गाड़ी तैयार थी — स्कूल में उन्हें भाषण देना था, विषय था: "शराबबंदी और शिक्षा का महत्व"। चायवाले ने चुपचाप बच्चे के सामने एक बिस्किट सरका दिया। बच्चे ने फटी किताब फिर खोली। उसके पन्ने पर कांपते हाथों से लिखा था — "किताब जलती है, कुर्सी नहीं..."

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

बहुत समय पहले की बात है रहमान चाचा के यहाँ एक चूहा रहता था. हर दिन की तरह उस दिन भी बाज़ार से गाँव लौटते वक़्त चाचा झोले में कुछ सामान लेकर � read more >>
सच्चे भाई सुबह की योगा क्लास लेने के बाद मैं पार्क से होते हुए बाजार वाली रोड पर सैर के लिए निकल पड़ी । सुबह के व� read more >>
लड़का: शुक्र है भगवान का इस दिन का तो मे कब से इंतजार कर रहा था। लड़की : तो अब मे जाऊ? लड़का : नही बिल्कुल नही। लड़की : क्या तुम मुझस read more >>
Join Us: