रघुवीर सिंह पंवार 16 Jun 2026 कहानियाँ समाजिक मां, मेरी फीस माफ कर दो... अब नहीं पढ़ना मुझे!" मोना की आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। सामने उसकी मां – चुपचाप, भीगी आंखों से उसे देख रही थी। आंसुओं में डूबी मां ने कहा 582 0 Hindi :: हिंदी
रघुवीर सिंह पंवार "मां, मेरी फीस माफ कर दो... अब नहीं पढ़ना मुझे!" मोना की आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। सामने उसकी मां – चुपचाप, भीगी आंखों से उसे देख रही थी। आंसुओं में डूबी मां ने कहा – "क्यों बेटी? अब तो बस एक वर्ष बचा है... फिर तू मास्टरनी बन जाएगी।" मोना फफक पड़ी — "मास्टरनी नहीं मां, अब मुझे सिलाई-कढ़ाई सीखनी है। पड़ोस की आशा दीदी की तरह। पढ़-लिखकर भी वह आज उसी मशीन पर बैठी है, जो मैं रोज धागों से साफ करती हूं।" ________________________________________ मोना सरकारी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ रही थी। क्लास में सबसेहोनहार तेज़। लेकिन पिछले महीने स्कूल की किताबें खरीदने के लिए मां ने अपनी झुमकी गिरवी रखी थी। और अब 12वीं की कोचिंग की फीस...? नीरा हर रोज स्कूल जाती, लेकिन अब मन किताबों में नहीं लगता था।दिन भर अपनी फ़ीस के लिए चिंतित घर लौटकर मां को देखती — जो दूसरों के बर्तन मांजकर, कपडे धोकर ,दो-चार झाड़ू पोछे कर दिन काट रही थीं। मां की उम्र ढल रही थी, हाथ कांपते थे ,हाथ पैर दर्द करते थे ... लेकिन मोना को पढ़ाने का सपना अब तक मजबूत था। वह सोचती थी मेरी तरह बेटी को लोगो के घर में काम नहीं करना पड़े ________________________________________ एक दिन स्कूल में सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका राधिका ने सवाल पूछा — "देश के विकास में सबसे ज़रूरी चीज क्या है?" हर बच्चा जवाब दे रहा था — सड़क, विज्ञान, सेना, उद्योग... मोना चुप थी। शिक्षिका ने पूछा — "तुम क्या सोचती हो मोना ?" वह खड़ी हुई और बोली — "देश के विकास में सबसे ज़रूरी चीज़ है — मां का सपना!" मा के अरमान पूरी क्लास चौंक गई। मोना बोलती रही — "जब एक गरीब मां अपनी थकी हड्डियों से अपनी बेटी को पढ़ाती है, तो वह सिर्फ एक बच्ची नहीं, समाज को प्रकाशित रोशन करने वाली चिंगारी बनती है। लेकिन अगर वही चिंगारी बुझ जाए — तो सिर्फ एक लड़की नहीं हारती, पूरा देश अंधेरे में डूब जाता है।" कक्षा में सन्नाटा था। शिक्षिका की आंखें नम थीं। ________________________________________ उस दिन शिक्षिका मोना के घर पहुंची। मां से बात की। मोना की कोचिंग की ज़िम्मेदारी खुद उठाने की बात कही। स्थानीय समाजसेवी,दानदाता भी आगे आए। मोहल्ले के कुछ लोगों ने चंदा इकट्ठा किया — "ये लड़की एक दिन हमारा नाम रोशन करेगी।" ________________________________________ अब मोना पहले से भी ज्यादा दिन -रात मेहनत करने लगी। 12वीं की परीक्षा में ज़िले में टॉप किया। शिक्षक बनी — लेकिन वहीं नहीं रुकी। पांच साल बाद मोना ने एक छोटी सी पहल शुरू की — "मां की पाठशाला" — जहां उन बच्चियों को पढ़ाया जाता है जो स्कूल छोड़ चुकी थीं, या जिनके मां-बाप उन्हें आगे पढ़ाना नहीं चाहते थे। मोना हर नई बच्ची से एक ही सवाल पूछती — "तुम्हारी मां का सपना क्या है?" और फिर कहती — "चलो, हम उसे पूरा करेंगे!" ________________________________________ सीख: देश का भविष्य सिर्फ बेटों की बाइक से नहीं, बेटियों की किताबों से बनता है। और किसी भी राष्ट्र का सबसे बड़ा शिक्षक — एक मां का सपना होता है।