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जब हो दृढ़ उत्साह-सपने हों साकार तब

संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 21683 0 Hindi :: हिंदी

कुंडलिया छंद
सपने हों साकार तब, जब हो दृढ़ उत्साह।
जोर शोर से मन लगा, करूं फतह हर राह।।
करूं फतह हर राह,खुशी में बीते जीवन।
 पूरा कर  कर्तव्य,सदा रहती तब खीवन।।
धन बल हो जब पास,साथ देते तब अपने।
खुशियाँ हो दिन रात,सत्य होते तब सपने।। 
              (खीवन:_मस्ती)
(स्वरचित मौलिक) 
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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