संदीप कुमार सिंह 06 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 29205 0 Hindi :: हिंदी
(मुक्तक छंद) नेता बन के भाषण दे रहे हो वादा भी कर रहे हो। पहन के सफेद कुर्ता पजामा सबको ही लुभा रहे हो। मौसम के तरह बदल जाओगे यह सत्य अब सब जानते_ जीते वर्ष भर नहीं हुए क्षेत्र भी आना भूल रहे हो। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....