संदीप कुमार सिंह 04 Sep 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 24229 0 Hindi :: हिंदी
जीवन है इक साधना, प्यार भाव है खास। कर्म राह ही मूल है, छोड़ें कभी न आस।। जीवन है इक साधना, नियम योग हो साथ। प्रेम भरे हो भावना, मंजिल मेरे नाथ।। जीवन है इक साधना, सुन्दर करिए कर्म। जीवन में तब फूल हो, करते रहिए धर्म।। जीवन है इक साधना, इसको रखिए याद। फर्ज सदा ही पालिए, करिए मत अवसाद।। जीवन है इक साधना, पूर्ण सत्य यह बात। प्राणी को मत कष्ट दो, प्रेम भरे हो नात।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....