संदीप कुमार सिंह 04 Sep 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 23463 0 Hindi :: हिंदी
जीवन के ये मूल हैं, ये ही हैं जगदीश।। जीव सभी के प्राण हैं, सुनते सरल पुकार। सुनते सरल पुकार, उद्धार करते सबका। पापी का कर नाश, करे धरती को हलका।। कहते कवि संदीप, गुणों से करें सम्मिलन। बनकर धर्म मशाल, शुद्ध होते यह जीवन।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....