संदीप कुमार सिंह 30 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 22419 0 Hindi :: हिंदी
जिसकी जैसी भावना, प्रभु का भी तस दृष्टि। वैसा ही वह कर्म कर,पाता आसी वृष्टि। पवित्र भाव से हरि मिले, मन भज ले हरि नाम_ पावन अनुपम कर्म कर,सुरभित करिए सृष्टि। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....