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कई बहाने मौत के-सबको जाना एक दिन धरे रहे सब आस

संदीप कुमार सिंह 28 Nov 2023 कविताएँ समाजिक कई बहाने मौत के,मुस्कुरा के ओ दिलरूबा,क्यों रूठे हो भगवान,कहाँ हम तुम्हारे,मैं आशिक दिवाना,देखूँ हमेशा.दिल कि कलम से लिखेंगे . 29350 0 Hindi :: हिंदी

#विधा:-दोहा  छंद 
#"सृजन समीक्षार्थ  प्रस्तुत"
कई  बहाने  मौत  के,महबूबा यह खास ।
सबको  जाना  एक दिन,धरे  रहे  सब  आस।।

कई  बहाने  मौत  के,यही  परम  है  सत्य।
  चार  रोज  की  चाँदनी,जो  है  अनुपम  तथ्य।।

कई  बहाने  मौत  के,इसका  कभी  न  वक्त।
जब जाने  का वक्त हो,मंद  पड़े  निज  रक्त ।।

कई  बहाने  मौत  के, अजब  गजब  तकदीर।
जिन्दा  रहते  पाप  में,लिप्त रहे  बहु  वीर।।

कई  बहाने  मौत  के,वापस  जाना  यार।
लोभ  मोह  को  छोड़कर,कर ले  प्रभु से  प्यार।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार  सिंह✍️
जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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