संदीप कुमार सिंह 05 Nov 2024 कविताएँ समाजिक My Poem gives to readers always benifitable idea.And how progress you will in your life? So gives true guidence. 32791 0 Hindi :: हिंदी
कलम की धार वो कैसी कलम की धार जिसमें असर न हो ? वो कैसी कलम की धार जो झूठ को डिगा न सके ? वो कैसी कलम की धार जिसमें सत्य प्रकाश न हो ? वो कैसी कलम की धार जिसमें न्याय की ज्वाला न हो ? कलम की धार तेज हो _ प्रखर हो, संवेदनशील हो _ गातिशील हो । जिसमें हक के लिए आवाज हो, समाज के उत्थान के लिए ज्योति हो। कलम की धार वो है जो विश्व का कल्याण करे, कलम की धार वो है जो नई जागृति पैदा करे । कलम की धार वो है जो झूठा भय को दूर करे, कलम की धार वो है जो झूठा संदेह को दूर करे। कलम की धार ऐसी हो जैसे फरिश्ता, कलम की धार ऐसी हो जैसे सूर्य प्रकाश। कलम की धार ऐसी हो जैसे चाँद= चाँदनी, कलम की धार ऐसी हो जैसे गर्मी में पवन। स्वर्णिम इतिहास लिख दे जो वो है कलम की धार, वर्तमान के लिए जो जुनून पैदा करे वो है कलम की धार। भविष्य के लिए जो सुदृढ तैयार करे वो है कलम की धार, भूत के पश्चाताप को जो दूर करे वो है कलम की धार। (स्वरचित मौलिक ) संदीप कुमार सिंह✍️
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....