संदीप कुमार सिंह 07 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 47721 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" कौरव पाया जीत कर,पांडव पर अधिकार। हार गए तिय द्रोपदी, और हुआ लाचार।। चीर हरण करने लगा,भरी सभा में दुष्ट। कृपा कृष्ण का जब हुआ,धर्म हुआ तब पुष्ट।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....