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कवि के मन की पीर-अपनापन में ह्रास

संदीप कुमार सिंह 28 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 34766 0 Hindi :: हिंदी

कवि के मन की पीर है,अपनापन में ह्रास।
सभी मतलबी आज हैं, सता रहा है त्रास।।

कवि के मन की पीर को, कलम देय आवाज।
होगा सबकुछ ठीक अब, यह मुझको है नाज।।

कवि के मन की पीर से,बदलेगी हालात।
खुशियां ही खुशियां रहे, होंगें सब अभिजात।।

कवि के मन की पीर पर, दे दो अब सब ध्यान।
लिखते हैं सबके लिए , करते दूर  अज्ञान।।

कवि के मन की पीर है, करें गरीबी दूर।
मिले सभी को हक सही, घर घर हों तब नूर।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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