Rajesh Kumar Sen Raj 22 Sep 2024 कविताएँ अन्य Shikshak ki mahima 16992 0 Hindi :: हिंदी
*कैसे बताऊं मैं तुम्हें* कैसे बताऊं मैं तुम्हें गुरु मीत है प्रीत है जीवन का संगीत है मार्ग का प्रशस्त है संघर्ष का शस्त्र हैं जिंदगी है बंदगी है रोशनी है ताजगी है कैसे बताऊं मैं तुम्हें गुरु जलता दीप है शीत की सुहानी धूप है आपका लक्ष्य उसका रूप है आम लोगों को वो कुरूप है हंसना उसका स्वरूप है परिणाम ही प्रसन्न रूप है कैसे बताऊं मैं तुम्हें गुरु सागर से साहिल है आपके ख्वाबों का मील है गुरु को ना कोई ढील है तुम्हारे लक्ष्य का नील है तुम्हारी आंखों में खुशियों की झील है मानो पक्षी तो चील है कैसे बताऊं मैं तुम्हें आराम उसे हराम है देखता सोचता तमाम है वह पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण ईशान है तुम्हारा रास्ता मंजिल उसकी पहचान है गुरु सुंदर साज है शिष्य का सरताज है अपना सब कुछ समर्पण आज है ज्ञान रुपी मेघ बरसाना यही उसका राज है कैसे बताऊं मैं तुम्हें गुर मीत है प्रीत है जीवन का संगीत है। राजेश कुमार सेन उच्च माध्यमिक शिक्षक शास कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घुवारा