संदीप कुमार सिंह 01 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 19200 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) गम मय जब हो चेहरा,क्या सोचेंगे लोग। देख हमें सब खुश रहे,आऊं नित उपयोग।। अच्छा करें समाज में,और सिखाएं योग। क्या सोचेंगे लोग सब,दूर रहे अब रोग।। क्या सोचेंगे लोग अब,करें नहीं संज्ञान। सतत लगे रह काम में,सफल रहे अभियान।। बड़े बड़े कर काम जब,होगा जग में नाम। क्या सोचेंगे लोग अब,इनसे रहे अवाम।। क्या सोचेंगे लोग ये,करिए नहीं विचार। पावन दिव्य प्रकाश से,करें जगत उजियार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....