संदीप कुमार सिंह 11 Nov 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है।जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभांवित होंगे। 50918 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_मुक्तक छंद #मात्रा भार:_22(11मात्रा पर यति) #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" लालच जो मैं किया, बुरा हुआ तब हाल। छूटा सब दोस्त है,गड़बड़ है अब काल। बस पछतावा मिले, कुछ कर नहीं सकता_ सही राह चल रहा, निश्चय सुधरे चाल। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....